भारत में आध्यात्मिक पर्यटन

आध्यात्मिकता की ओर जाने वाले पर्यटन को आध्यात्मिक पर्यटन के रूप में जाना जाता है। आध्यात्मिकता का अर्थ है अपने जीवन का सही उद्देश्य और अर्थ खोजना। आजकल, आध्यात्मिक पर्यटन दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है क्योंकि अध्यात्म को पाने के लिए अधिक से अधिक पर्यटक खोज पर निकल रहे हैं। भारत आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छी जगह हैं। भारत हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म जैसे कुछ महान धर्मों का जन्मस्थान है। हिंदू धर्म एक समृद्ध संस्कृति से युक्त सबसे समृद्ध धर्मों में से एक है।

भारत में पूरे देश में फैले कई पवित्र स्थान हैं लेकिन उनमें से कुछ को अधिक महत्व दिया गया है और हर साल लाखों लोगों द्वारा पूजा की जाती है। 8 वीं शताब्दी के दौरान, आदि शंकराचार्य नामक एक महान ऋषि थे। उन्हें हिंदू धर्म के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म ग्रंथों में चार पवित्र स्थानों के बारे में गहराई से उल्लेख किया है जिनमें बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम शामिल हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार इन पवित्र स्थानों पर जाने से मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है। हर साल लाखों तीर्थयात्री इन चार स्थानों की यात्रा करते हैं, ये स्थान सामूहिक रूप से “चार धाम” के रूप में प्रसिद्ध हैं। ये चार पवित्र स्थान का अपना व्यक्तिगत  इतिहास हैं।

 

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हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि समय चार युगों में विभाजित है – सत्युग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। इन सभी युगों का अपना महत्व है। दिलचस्प बात यह है कि चार धाम अलग-अलग युगों में बनाए गए थे। हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि सभी चार धाम की पूजा करने के बाद व्यक्ति भौतिकवादी सुखों के जाल से मुक्त हो जाता है और अंत में भगवान को प्राप्त करता है।

 

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“चार धाम” के स्थान भारत में विभिन्न दिशाओं में स्थित हैं। बद्रीनाथ उत्तर में, जगन्नाथ पुरी पूर्व में, पश्चिम में द्वारका और दक्षिण में रामेश्वरम स्थित है इन पवित्र स्थानों की यात्रा के दौरान कई मंदिर रास्ते में आते है। “चार धाम यात्रा” एक साहस और रोमांच का अनुभव देती है और साथमे आध्यात्मिक उत्थान का अनुभव भी देती है।

 

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आइए अब चार पवित्र स्थानों के आध्यात्मिक महत्व को देखें, जिन्हें “चार धाम” के नाम से जाना जाता है: –

 

बद्रीनाथ

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बद्रीनाथ, उत्तराखंड राज्य में चमोली जिले में स्थित एक शहर है। यह शहर नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं और नीलकंठ शिखर (6,560 मीटर) की छाया में स्थित है। कस्बे में बद्रीनाथ के मंदिर की उपस्थिति के कारण पूरे शहर का नाम बद्रीनाथ रखा गया। बद्रीनाथ में मन, व्यास गुफ़ा, मातमॉर्टी, चरणपादुका, भीमकुंड और सरस्वती नदी के मुख जैसे अद्भुत दर्शनीय स्थल हैं, ये सभी बद्रीनाथ के 3 किमी के भीतर स्थित हैं। अन्य धामों की तुलना में, बद्रीनाथ एकमात्र मंदिर है जो पर्यावरणीय कठिनाइयों के कारण हर साल अप्रैल से अक्टूबर तक खुला रहता है। बद्रीनाथ दो शब्दों बद्री और नाथ से बना है। बद्री और नाथ संस्कृत शब्द हैं और वे क्रमशः जामुन और भगवान का उल्लेख करते हैं।

 

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नारायण को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में जाना जाता है। सतयुग के दौरान नारायण सर्वोच्च चेतना प्राप्त करने के लिए गहन तपस्या कर रहे थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया नारायण को प्रकृति के कष्टों का सामना करना पड़ा जैसे भारी बारिश और सूरज से चिलचिलाती धूप इन कष्टों के बावजूद उन्होंने अपनी तपस्या को नहीं रोका, वो आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प थे। देवी लक्ष्मी जो कि धन की देवी हैं, नारायण के दृढ़ संकल्प को देखकर प्रभावित हो गईं और स्वयं उस विशेष स्थान पर एक बड़ा बेर का पेड़ बन गई, जहां नारायण तपस्या कर रहे थे। देवी लक्ष्मी का इरादा उन्हें आश्रय प्रदान करके बारिश और सूरज से बचाने का था। उस दिन से यह स्थान बद्रीनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया

 

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रामेश्वरम

 

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रामेश्वरम भारत के तमिलनाडु राज्य में दक्षिण में स्थित है। यह भारतीय प्रायद्वीप के बहुत ऊपर मन्नार की खाड़ी में स्थित है। त्रेता युग के दौरान हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण नाम का एक राक्षस था जो लंका का शासक था जिसे वर्तमान में श्रीलंका नाम दिया गया है। रावण एक उच्च योग्य विद्वान, एक महान शासक और एक महान योद्धा था। किसी के द्वारा अपरिहार्य होने के अपने बढ़ते अहंकार के कारण, वह क्रूर होने लगा। “रामायण” नाम का एक बहुत प्रसिद्ध पवित्र ग्रन्थ है जहाँ उल्लेख है कि त्रेता युग के दौरान रावण ने राम की पत्नी सीता का अपहरण किया और उन्हें जबरदस्ती अपने राज्य लंका ले गया। सीता को लंका स्थित अशोक वाटिका में एक कैदी के रूप में रखा गया था। रावण को सीता से शादी करने की इच्छा थी लेकिन सीता को यह मंजूर नहीं था और उसे गहरी मान्यता थी कि राम उसे मुक्त करने अवश्य आएंगे।

 

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लंका एक द्वीप पर स्थित थी इसलिए उस तक पहुंचना बहुत मुश्किल था। राम एक निडर महान योद्धा थे और उन्होंने समुद्र के पार जाने के लिए तमिलनाडु में पंबन द्वीप और श्रीलंका में मन्नार द्वीप को जोड़ने वाला एक पुल बनाने का फैसला किया। विजय प्राप्त करने के लिए, राम ने एक शिवलिंग बनाया और उनका आशीर्वाद पाने के लिए शिव की पूजा की। उस समय से वह शिवलिंग रामेश्वरम नाम से प्रसिद्ध हो गया। राम ने वानर राजा सुग्रीव और वानरों की सेना की सहायता से चूना पत्थर की शिलाओं का उपयोग करके एक पुल बनाया। राम, उनके भाई लक्ष्मण और पूरी वानर सेना ने समुद्र पार किया और फिर लंका पर हमला किया, राजा रावण मारा गया और सीता को बचाया गया। राम को भगवान विष्णु का सातवाँ अवतार माना जाता है। रामेश्वरम को बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक के रूप में जाना जाता है।

 

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द्वारका

 

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गुजरात राज्य में द्वारका स्थित है। यह शहर संस्कृत भाषा में “द्वार” शब्द के अर्थ से अपना नाम प्राप्त करता है। यहाँ गोमती नदी अरब सागर में विलीन हो जाती है। द्वारका का निर्माण पहली बार द्वापर युग में हुआ था, इसे भगवान श्री कृष्ण ने बनवाया था। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवाँ अवतार माने जाते हैं।

श्री कृष्ण एक महान राजा और सच्चे योद्धा थे। वह सार्वभौमिक सर्वोच्च है। उन्होंने महाभारत युद्ध के दौरान योद्धा अर्जुन को महान पवित्र पुस्तक “श्री भगवत गीता” सुनाकर “धर्म” और “सत्य” का सही अर्थ स्थापित किया। “श्री भगवत गीता” जीवन को सही तरीके से जीने का तरीका सिखाती है। जो व्यक्ति “भगवत गीता” पढ़ता और समझता है, वह आत्म-चेतना प्राप्त करता है। ऐसा माना जाता है कि समुद्र के कारण हुए नुकसान और विनाश के कारण, द्वारका छह बार जलमग्न हो गया था और आधुनिक द्वारका क्षेत्र में निर्मित होने वाला सातवाँ वां ऐसा शहर है।

 

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जगन्नाथ पुरी

 

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जगन्नाथ पुरी मंदिर भारत के पूर्वी तट पर ओडिशा राज्य में पुरी शहर में स्थित है। यह भगवान विष्णु का एक रूप भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहाँ भगवान कृष्ण की बहन देवी, सुभद्रा की पूजा उनके दो भाइयों, भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र के साथ की जाती है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर जगन्नाथ पुरी लगभग हज़ार साल पुराना है और इसका निर्माण राजा चोदा गंगा देव और राजा तृतीया अनंग भीम देव ने करवाया था। जैन शास्त्रों के अनुसार जगन्नाथ शब्द का अर्थ ‘विश्व व्यक्ति’ है।

 जगन्नाथ पुरी में महान “रथ यात्रा” उत्सव मनाया जाता है। “रथ यात्रा” उत्सव में देवी सुभद्रा, भगवान जगन्नाथ, और भगवान बलभद्र को एक रथ पर बैठाया जाता है और पूरे शहर में घुमाया जाता है। दुनिया भर से हर साल लाखों लोग “रथ यात्रा” देखने आते हैं।

 

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भारत में कई पवित्र स्थान हैं, किसी के लिए भी जीवनकाल में प्रत्येक पवित्र स्थान पर जाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। “चार धाम यात्रा” एक साहसिक और कभी न भूलने वाली यात्रा है। यह यात्रा आपको आध्यात्मिकता प्राप्त करने में निश्चित रूप से मदद करेगी। यदि संभव हो तो सभी को पुण्य प्राप्ति के लिए चार धाम की यात्रा करनी चाहिए।